भाजपा की चंद्रपुर विधानसभा सीट को लेकर और विद्यमान विधायक किशोर जोर्गेवार के पक्ष को लेकर आखिरकार पूर्णविराम लग गया। महाराष्ट्र मंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार के नेतृत्व में आज दिनांक 27 अक्टूबर 2024 को दोपहर 12:30 बजे जंग चांदा ब्रिगेड के संस्थापक तथा चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक किशोर जोर्गेवार ने भाजपा पक्ष प्रवेश कर लिया। उन्हीं के साथ कांग्रेस में सांसद धनोरकर से मतभेद के बाद पार्टी छोड़कर आयी पूर्व महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष नम्रता थेमसकर ने भी मुनगंटीवार के नेतृत्व में भाजपा में प्रवेश लिया। ईस उपलक्ष में चंद्रपुर के होटल एन डी में आयोजित पत्रकार परिषद में सुधीर मुनगंटीवार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के नेताओं का और कार्यकर्ताओं का मन मिलाप हो चुका है और सब मिलकर भाजपा उम्मीदवार को जीतने के लिए जी जान से कोशिश करेंगे। उन्होंने बताया कि जोर्गेवार का पक्ष प्रवेश सभी की सम्मति से हुआ है और अब कोई किसी का किसी से मनमुटाव नहीं है।
पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें विश्वास है की बृजभूषण पाजारे को चुनाव के बाद योग्य सम्मान और न्याय मिलेगा तथा बाजार है किसी भी कीमत पर अपक्ष चुनाव नहीं लड़ेंगे।

इस दौरान मुनगंटीवार ने जोर्गेवार और थेमसकर को भाजपा का दुपट्टा पहनाकर उनका पक्ष में स्वागत किया। यहां एक बात विशेष थी कि पूरे कार्यक्रम में जोर्गेवार ने माइक पर एक शब्द भी नहीं बोला इसके बाद यह भी पूछा जा रहा है की क्या उन्हें जानबूझकर बोलने नहीं दिया गया? यहां तक की एक पत्रकार के जोर्गेवार को पूछे गए प्रश्न का भी उत्तर मुनगंटीवार ही दिया। इसके बाद यह चर्चा है की यह कार्यक्रम और प्रवेश जोरगेवार की मजबूरी थी या मुनगंटीवार की? या दोनों की समय सूचकता थी?
हाई कमान के आदेश पर स्थानिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की इच्छा नहीं होने के बावजूद मुनगंटीवार को जोर्गेवार का पक्ष प्रवेश करना पड़ा, मगर क्या भाजपा कार्यकर्ता सही में चुनाव में जोरदार के लिए कार्य करेगा? ऐसी शंका सर्वत्र जताई जा रही है। इस तरह कुछ लोग दबी आवाज में यह भी कह रहे हैं की 5 वर्ष भरपूर काम करने के बाद जोर्गेवार को ऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी कि उन्हें मुनगंटीवार के नेतृत्व में कार्य करने और चुनाव लड़ने मजबूर होना पड़ा?
जोर्गेवार के भाजपा प्रवेश से जहां एक और उन्हें हिंदुत्व के नाम पर भाजपा के वोटो का फायदा मिल सकता है वही मुस्लिम और दलित वोटो का नुकसान भी हो सकता है।अब यह आने वाला समय ही बताएगा की उनका यह फैसला भाजपा तथा उनके लिए फायदे का सौदा है या घाटे का?



