Sunday, April 19, 2026
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शिवसेना उबाठा जिला प्रमुख रविंद्र शिंदे का बैंक अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रवेश, शिंदे की चाल या सेना की हार?

पहले से ही सेंध लगी नाव में सवारी कर रही चंद्रपुर जिले की शिवसेना में एक और भूचाल आ गया है। कई वर्षों बाद एक सशक्त और सक्षम नेतृत्व के रूप में माने जाने वाले भद्रावती के रविंद्र शिंदे को जिला प्रमुख का पद देकर शिवसेना ऊबाठा हाई कमान ज्यादा दिन खुशियां नहीं मना सका। चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव के बीच रविंद्र शिंदे ने विधायक जोर्गेवार, भांगडिया और देवताले की उपस्थिति में चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा का दुपट्टा अपने गले में मुंबई जाकर पहन लिया। इसे उद्धव शिवसेना की हार या रविंद्र शिंदे की चाल यह समझने के लिए क्रमानुसार कुछ विषय समझना जरूरी है।

4 जनवरी 2023 को भद्रावती वरोरा विधानसभा प्रमुख पद पर नियुक्त रविंद्र शिंदे नियुक्ति से केवल एक वर्ष पहले से उद्धव सेना में प्रवेश करके जिला प्रमुख बनने का प्रयत्न कर रहे थे। कांग्रेस की पार्श्वभूमी वाले शिंदे एक समय धानोरकर के मित्र और भागीदार हुआ करते थे। मगर बाद में न केवल विरोध बल्कि तकरीबन शत्रु जैसी स्थिति दोनों में आ गई थी। उस वक्त धानोरकर परिवार उस क्षेत्र में तथा जिले में जबरदस्त सशक्त हो चुका था। उसी के तोड़ के लिए रविंद्र शिंदे की उद्धव सेना में प्रवेश करने की कवायत चल रही थी। रविंद्र शिंदे के सहकार क्षेत्र में गतिविधियों के चलते, जिले में उद्धव सेना के पदाधिकारीयो का उनके प्रवेश पर जबरदस्त विरोध था। मगर आखिरकार पैसों के जोर पर और मुंबई के पदाधिकारी की आंखों में धूल झोंककर उन्होंने जिला प्रमुख नहीं तो विधानसभा प्रमुख का पद हासिल कर ही लिया।

इसका विरोध उस वक्त वहां के जिला प्रमुख मुकेश जीवतोड़े, चंद्रपुर के जिला प्रमुख संदीप गिरे और जिला संपर्क प्रमुख प्रशांत कदम ने किया। मगर धानोरकर के विरोध के रूप में एक सशक्त उम्मीदवार मिलता देख सेना भवन में सभी विरोध दरकिनार किए। पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे, खासदार संजय राउत के इस भरोसे को रविंद्र शिंदे ने ताबड़तोड़ कार्यक्रम लेकर मजबूत भी किया। भद्रावती, वरोरा में भव्य और शानदार कार्यालय का शुभारंभ किया। बावजूद इसके उद्धव सेना में जिला स्तर से लेकर मुंबई तक उनका विरोध बना रहा। इस दौरान दिसंबर 2023 को उद्धव शिवसेना के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव को विदर्भ संपर्क नेता की जिम्मेदारी दी गई।

अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके रविंद्र शिंदे सेना में अपनी स्थिति मजबूत करने लगे रहे। उन्हें उम्मीद थी की विधानसभा चुनाव में उद्धव सेना की ओर से उन्हें टिकट मिल सकती है नहीं तो जिला प्रमुख पद मिल सकता है। हुआ भी कुछ ऐसा ही, 28 जून 2024 को अचानक जिले की उद्धव सेना में बड़ा फेरबदल करते हुए रविंद्र शिंदे को चंद्रपुर तथा भद्रावती विधानसभा क्षेत्र का जिला प्रमुख घोषित कर दिया गया। वही संदीप गिरे को बल्लारशाह और राजुरा विधानसभा क्षेत्र तथा मुकेश जीवतोड़े को ब्रह्मपुरी और चिमूर विधानसभा क्षेत्र का जिला प्रमुख घोषित किया गया। मगर इसके विरोध में संदीप गिरे, मुकेश जीवतोड़े, जिला संपर्क प्रमुख प्रशांत कदम ने सेना भवन में मोर्चा खोल दिया और उन्हें साथ मिला विदर्भ संपर्क नेता भास्कर जाधव का। विदर्भ संपर्क नेता होने के बावजूद इस नियुक्ति में उन्हें विश्वास में नहीं रखा गया इसकी नाराजी भास्कर जाधव को थी। जिस वजह से उन्होंने उस वक्त संदीप गिरे और मुकेश जीवतोड़े का साथ दिया। अंतिम निर्णय लेने के लिए चंद्रपुर के सक्रिय वरिष्ठ शिवसैनिकों को तथा पदाधिकारीयो को सेना भवन बुलाया गया। जहां पर संदीप गिरे ने अपने पारंपरिक विरोधी को कूटनीति के जरिए अपने खेमे में कर लिया जिस वजह से भास्कर जाधव की अंतिम रिपोर्ट पर मातोश्री से पुनः फेरबदल करते हुए संदीप गिरे को चंद्रपुर दे दिया गया और रविंद्र शिंदे को वरोरा भद्रावती तक सीमित कर दिया गया। फिर भी नवंबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद से रविंद्र शिंदे कार्य करते रहे। मगर यहां पर सांसद धानोरकर ने अपना पावर दिखाते हुए अपने भाई के लिए भद्रावती विधानसभा क्षेत्र से महा विकास आघाडी की सीट पक्की की। इसी के बाद से रविंद्र शिंदे का मन और काम उद्धव शिवसेना में कम होता चला गया।

फिर बारी आई 13 साल बाद होने वाले चंद्रपुर मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव की। जो कि रविंद्र शिंदे का वास्तविक कार्य क्षेत्र था। यहां तक भी सब कुछ ठीक चल रहा था जब उन्होंने उद्धव शिवसेना के नाम से संचालक पद पर खुद को तथा अन्य उम्मीदवार को जीत भी दिलाई। उनके पास 3 से 4 उम्मीदवार होने की वजह से वह किंग मेकर की भूमिका में आ गए। महा विकास आघाडी की ओर से उन्हें मिलाकर 12 संचालक तथा भाजपा की ओर से 11 संचालक होने का दावा किया जा रहा था। उल्लेखनीय है कि इन चुनाव के दौरान रविंद्र शिंदे अपने मित्र तथा चिमूर के विधायक बंटी भांगड़िया से नियमित संपर्क में थे। मौके की नजाकत को देखते हुए माना जा रहा है की विधायक किशोर जोर्गेवार की ओर से रविंद्र शिंदे को अध्यक्ष पद का लालच देते हुए भाजपा में प्रवेश का ऑफर दिया गया और इसे विधायक बंटी भांगड़िया ने अंजाम तक पहुंचाया। उद्धव शिवसेना में निकट भविष्य में कोई बड़ा मौका ना दिखने की वजह से तथा पारंपरिक विरोधक धानोरकर परिवार दिन-ब-दिन मजबूत होने की वजह से तथा महा विकास आघाडी की ओर से उनका ऑफर स्वीकृत न होने की वजह से रविंद्र शिंदे को सहकारी क्षेत्र की राजनीति में टिके रहने के लिए भाजपा का दामन थामना उचित लगा।

मगर इसे उद्धव शिवसेना को झटका माना जाए या रविंद्र शिंदे का बैंक अध्यक्ष के लिए जिला प्रमुख पद का त्याग यह समझना मुश्किल है।

बहरहाल उद्धव शिवसेना के सामने चंद्रपुर में एक बार फिर सक्षम नेतृत्व का बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है और आने वाले महानगर नगर परिषद तथा जिला परिषद चुनाव में उनकी राह और कठिन हो गई है। यह भी देखना दिलचस्प होगा की रविंद्र शिंदे के बाद जिले की उद्धव शिवसेना में और फूट पड़ती है या नहीं।

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