Sunday, April 19, 2026
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CSTPS एशिया का सबसे बड़ा विद्युत केंद्र या भ्रष्टाचार केंद्र?

चंद्रपुर अपनी कुछ बातों के लिए विश्व विख्यात है ताडोबा उसमें से एक है और चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र यह दूसरा है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त है। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के हाथों से उद्घाटित यह विद्युत केंद्र एक जमाने में एशिया खंड का सबसे बड़ा विद्युत केंद्र था। मगर समय-समय पर राजनेताओं की दखल से और कुछ अधिकारियों के भ्रष्टाचार से यह विद्युत केंद्र बदनाम भी होता रहा है। अब तो यह विद्युत केंद्र सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के लिए राजनीतिक चंदा, धन उगाही और अपने लोगों को गैर कानूनी तरीके से काम दिलाने का अड्डा बन चुका है। यहां पर आने वाले अधिकारी भी अब इस सिस्टम को समझ गए हैं और कुछ सत्ताधारी नेताओं को खुश रखकर बाकी यह मनमानी तरीके से खुद की संपत्तियां बना रहे हैं और बिना सिर पैर के कानून बनाकर यहां काम करने वाले ठेकेदार और विजिटर्स को परेशान करते हुए अपने इशारे पर नचा रहे हैं।

फिर भी कुछ महीना पहले तक कानून से काम होने का दिखावा तो भी चलता था और आम आदमी को भी मुख्य अभियंता तक मिलकर अपनी बात पहुंचाने का मौका मिलता था। मगर जब से यहां पर नए मुख्य अभियंता गिरीश कुमारवार आए हैं तब से तो इनके कार्यालय पर जैसे किलेबंदी हो चुकी है।

एक तुगलती फरमान के जरिए अब कोई भी आम इंसान, छोटा-मोटा राजनेता, पत्रकार या नया काम करने इच्छुक कोई ठेकेदार यहां पर पैर भी नहीं रख सकता। पहले सारे लोगों को मुख्य कार्यालय के बिल्डिंग प्रवेश द्वार तक जाने की अनुमति थी, जहां से सुरक्षाकर्मी संबंधित साहब को फोन लगाकर आने वाले की जानकारी देते हुए प्रवेश की अनुमति लेता था या अधिकारी व्यस्त होने पर उन्हें बाद में आने की सलाह दी जाती थी। यह परंपरा तकरीबन 25–30 सालों से शुरू थी। यह प्रक्रिया सभी को मान्य थी और इसकी शिकायत आज तक नहीं हुई थी।

मगर अब नई प्रक्रिया अनुसार आंगतुक को इमारत के कंपाउंड के मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा रास्ते में ही रोक दिया जाता है और उसी से मांग की जाती है की जिससे मिलना है पहले उससे हमें फोन पर बात कराए। अगर आने वाले के पास अधिकारी का मोबाइल नंबर ना हो या मीटिंग की वजह से अगर अधिकारी फोन ना उठाएं तो उस विजिटर को घंटो तक रास्ते पर खड़े रहना पड़ता है और कई बार अधिकारी से बिना मिले वापस जाना पड़ता है। जिसमें जिले और राज्य से दूर-दूर से आने वाले लोग शामिल होते हैं। आने वालों में कभी किसी राजनीतिक पार्टी के नेता भी होते हैं, पत्रकार भी होते हैं या फिर कोई अति आवश्यक जरूरतमंद व्यक्ति भी होता है और प्रवेश नहीं मिलने पर इनकी सुरक्षा कर्मियों से दो-दो बात होकर हुज्जतबाजी भी होती है जिस वजह से इस नियम से खुद यहां के सुरक्षाकर्मी भी परेशान है।

इतना ही नहीं अधिकारी द्वारा अनुमति देने पर प्रवेश पास लेकर गया व्यक्ति अगर किसी दूसरे अधिकारी को मिल लेता है, तो भी सुरक्षा कर्मियों को उपमुख्य अभियंता एडमिन डॉ भूषण शिंदे की ओर से डांट फटकार सुनाई पड़ती है। जबकि अंदर गए हुए व्यक्ति पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता और यह त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया में उनकी जवाबदारी नहीं होती।

इसके अलावा इस प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगाया गया है जिसके अनुसार विजिटर के लिए केवल सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को दोपहर 3:30 से 5:30 बजे तक ही मिलने का समय लिखा गया है। इसी तरह बुधवार, शनिवार और छुट्टी के दिन मिलने की मनाई है। जबकि यह अधिकारी खुद मिलने के मनाई वाले दिन और समय पर लोगों को मिलने बुलाते हैं, जिसे देखकर बाकी लोग भी मिलने जाते हैं, जिससे सुरक्षा कर्मियों की परेशानी बढ़ जाती है।

 

मगर अब असली सवाल यह उठता है की इन अधिकारियों को किस बात का डर है और क्यों इन्होंने इतनी जबरदस्त किला बंदी कर रखी है? ऐसा तभी होता है जब किसी के जान को खतरा हो या कोई राज खुल जाने का डर हो। जान को खतरे की बात तो यहां लागू नहीं होती। तो क्या राज खुल जाने के डर से यह अधिकारी लोगो को खुद से दूर रखकर सीमित लोगों से ही संपर्क में रहते हैं? अगर ऐसा है तो वह राज क्या हो सकते हैं? क्या इनका संबंध भ्रष्टाचार से हो सकता है? वरना क्यों यह अधिकारी खुद को इतने ताले बंद वातावरण में रखे होते? इस कानून में एक विशेष बात नजर आई, वह यह की एक विशिष्ठ पार्टी के किसी भी छोटे-बड़े नेताओ को यहां आने-जाने की और मुख्य अभियंता से भी मिलने की रोक-टोक या मनाई बाकिओ जैसी नहीं है। आखिर क्यों? क्या यह कुछ नेताओं के साठगांठ करके किसी बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देने का तरीका है?

क्यों यह अधिकारी आम जनता से, पत्रकारों से, दूसरे पार्टी के नेताओं से मिलने से डरते हैं?

पार्थशार समाचार ने अब इस भ्रष्टाचार के केंद्र से हर राज् का पर्दा उठाने का फैसला किया है। इसलिए अब हम, लोगों तक और पुलिस तथा प्रशासन तक यहां पर होने वाले हर घोटाले की और उसमें लिप्त अधिकारियों की खबर बनाकर जागरूकता फैलाते रहेंगे। इस सीएसटीपीएस यानी चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र से कोई भी व्यक्ति या संस्था पीड़ित हो तो, वह हमसे संपर्क कर सकते हैं। आवश्यकता नहीं होने पर सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाएगा और पीड़ित व्यक्तियों को न्याय दिलाने के लिए पार्थशर समाचार पुलिस तथा प्रशासन से पूर्ण मदद दिलाने के लिए सहकार्य करेगा।

फिलहाल लोगों की मांग पर मिलने वालों के लिए बनाए गए नियम, दिन और वक्त बदलकर उन्हें सम्मान पूर्वक व्यवहार देने की मांग की जा रही है। अन्यथा पीड़ित लोगों ने मानव अधिकार संगठन से भी मदद लेने का इशारा दिया है।

बड़े जल्दी पार्थशर समाचार यहां हो रहे अनियमित कार्यों का और भ्रष्ट अधिकारियों का पर्दाफाश करके आप तक जानकारी पहुंचता रहेगा।

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