Monday, April 20, 2026
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

चंद्रपुर के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी द्वारा अपने ही रिश्तेदार को देसी कट्टा और गाय का मांस छुपा कर फसाने की साजिश

*रिश्तेदार को फसाकर शहर में हिंदू मुस्लिम दंगे फैलाने की कोशिश तो नहीं?*

*पुलिस की सुस्त करवाई, रोटी सेंकने की कोशिश?*

आज चंद्रपुर शहर में बहुत ही विचित्र और भयानक घटना घटी। घटना इतनी भयंकर थी कि एक व्यक्ति आतंकवादी गतिविधी में और गोमास बेचने के आरोप में जीवन भर सलाखों के पीछे हो जाता और शायद इसके तनाव से शहर और बाद में राज्य में हिंदू मुस्लिम दंगे भी भड़क सकते थे

 

मगर उसे व्यक्ति को उसके होटल के स्टाफ ने और सीसीटीवी कैमरे ने बचा लिया।

घटना नागपुर रोड स्थित होटल अल जमजम की है जहां आज सुबह 7:00 बजे होटल के संचालक नागपुर के अब्दुल शकील के चंद्रपुर के करीबी रिश्तेदार जो शहर के प्रतिष्ठित व्यवसाय तथा नागरिक माने जाते हैं उन्होंने चोरी छुपे अब्दुल शकील की कार में देसी कट्टा और होटल के कंपाउंड में गाय का मांस और हड्डियां छुपा कर भागने की कोशिश की। मगर उनका यह षड्यंत्र होटल के स्टाफ क्वार्टर में पीछे के आंगन में नहा रहे एक कर्मचारी के देखने से असफल हो गया। कर्मचारियों ने उस व्यक्ति की चाल पर उसे पहचान भी लिया। जिससे बाद में पुलिस को उस शख्सियत की पहचान करने में आसानी हुई।

दरअसल यह मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा लगता है। क्योंकि षड्यंत्र करने वाला और जिसके खिलाफ षडयंत्र किया गया दोनों करीबी रिश्तेदार है। इससे पहले भी इस षड्यंत्रकारी ने अब्दुल शकील पर दो बार लोहे की रॉड और चाकू से हमला कर चुका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस बार होटल के संचालक अब्दुल शकील ने बिना देरी किए पुलिस में रिपोर्ट लिखा दी। मगर शाम 6:00 बजे तक पुलिस का पंचनामा ही चल रहा था और खबर लिखे जाने तक ना तो FIR दर्ज हुई नाही आरोपी और उसके द्वारा अपराध में इस्तेमाल की गई गाड़ी को हिरासत में लिया गया था।

 

फरियादी अब्दुल शकील को यह शंका है कि आरोपी एक प्रतिष्ठित और पैसे वाला व्यक्ति होने की वजह से कहीं उसकी केस कमजोर न कर दी जाए या दबाने की कोशिश ना की जाए।

पार्थशर समाचार अपने दर्शकों के लिए FIR दर्ज होते ही एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज और फिरयादी का इंटरव्यू अपने यूट्यूब न्यूज़ चैनल के माध्यम से जल्द ही पेश करेगा।

मगर सवाल यह उठता है कि आरोपी की पहचान होने के बाद और उसने देसी कट्टा किसी दूसरे के कार में छुपाने की बात साबित होने के बाद भी पुलिस ने अब तक आरोपी को हिरासत में क्यों नहीं लिया? देखना है कि FIR के बाद पुलिस क्या एक्शन लेती है। क्योंकि देसी कट्टा इतनी आसानी से उपलब्ध होना और गाय का मांस किसी को फसाने के लिए इस्तेमाल करना गंभीर मामला है। यह मामला गलतफहमियों की वजह से हिंदू मुस्लिम दंगे में भी परिवर्तित हो सकता था।

संबंधित खबरे
- Advertisment -spot_img

ताज्या बातम्या

लोकप्रिय खबरे

You cannot copy content of this page