चंद्रपुर महानगर पालिका और चंद्रपुर यातायात पोलिस किस कदर बेपरवाह है, इसका उदाहरण चंद्रपुर के रास्तों के चप्पे चप्पे पर रोज देखने मिल जाएगा। मगर चंद्रपुर का ऐसा चौक, जिसने 50 से अधिक लोगों की बलि ली थी और खूनी चौक के नाम से प्रसिद्ध है, ऐसा पुराना वरोरा नाका चौक, जहां पर कई वर्षों से मांग रहने के बावजूद ना ही ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे और ना ही ट्रैफिक पोलिस यहां पर होती थी। पार्थशर समाचार ने कई बार इसकी रिपोर्टिंग करने के बाद पिछले कुछ महीनों पहले इस चौक पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए। जिसको देख कर लगा जैसे जनता की जीत हुई, मगर उसके बाद 6 महीने से अधिक होने के बावजूद अब तक यह सिग्नल पूर्णतः शुरू नहीं किए गए थे। जिस वजह से यहां पर निरंतर दुर्घटनाएं होने का सिलसिला शुरू है। आज एक बार फिर यह सिग्नल शुरू किए गए मगर यातायात पोलिस के नदारत होने की वजह से इस सिग्नल का कोई अर्थ नहीं रह गया और लोग बिंदास बड़ी बड़ी बस, ट्रक, बाइक सिग्नल तोड़ के जा रहे थे, जो कि अधिक खतरनाक बन गया। जब सिग्नल नहीं होता है तो कम से कम लोग आपस में समझदारी दिखा कर क्रॉस कर लेते मगर सिग्नल होने के बाद लोग सिग्नल के भरोसे क्रॉस करते है और इसमें जब कोई सिग्नल तोड़ता है तो बड़े दुर्घटना की संभावना बन जाती है। इस वजह से महानगर पालिका और यातायात पोलिस तुरत इस ओर ध्यान देकर यहां पर नियमित सिग्नल शुरू कराके नियमित यातायात पोलिस रखे ऐसी मांग यहां की जनता उठा रही है।




