चंद्रपुर के डॉ. अशोक जीवतोड़े और उनका परिवार लगातार कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर बहुजन समाज के लिए काम कर रहा है. यह परिवार शिक्षण संस्थानों और ओबीसी आंदोलन के जरिए बहुजन समाज के उत्थान के लिए काम कर रहा है. उनके कार्य में निष्ठा, निरंतरता और ईमानदारी होती है। इस परिवार के प्रयासों से बहुजन समाज को एक मंच मिला है। अतः उन्हें बहुजन का एक प्रभावी नेतृत्व कहा जा सकता है। शिक्षा, सामाजिक और आंदोलन क्षेत्र से लेकर के राजनीतिक क्षेत्र में उनकी उपस्थिति उल्लेखनीय रही है। सबका मानना है की अगर वे राजनीतिक क्षेत्र से संवैधानिक पद पर जा सकें, तो बहुजनों का काम आसान हो जायेगा, पूर्वी विदर्भ में उन्हें अधिक ताकत के साथ अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हैं। शिक्षा आंदोलन, ओबीसी आंदोलन, विदर्भ विकास आंदोलन में उनकी सक्रियता, उनके व्यक्तित्व की गवाही देते हैं। आज उनके जन्मदिन पर लोगो की यही सद्भावना है कि समाज के लिए ऐसे ही बहुजन नेतृत्व का विकास हो और उनके द्वारा जनकल्याण का कार्य हो।

पश्चिम महाराष्ट्र से कर्मवीर भाऊराव पाटिल, पश्चिम विदर्भ से डाॅ. पंजाबराव देशमुख जैसा ही शिक्षा के क्षेत्र में पूर्वी विदर्भ के पूर्व विधायक श्रीहरि जीवतोड़े गुरुजी ने शैक्षणिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया और शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाया। उसी परिवार में डाॅ. अशोक श्रीहरि जीवतोड़े का जन्म हुआ। एम. कॉम., एम. ए., एम. फिल., एम. एड., पीएचडी ऐसी शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने शिक्षण पेशे में प्रवेश किया और 1992 से, वह पूर्वी विदर्भ के सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थान, चांदा शिक्षण प्रसारक मंडल के सचिव के रूप में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। सचिव के रूप में काम करते हुए, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने जनवरी 2008 में कुनबी, किसान समुदाय को एकजुट करने का काम किया और बड़े उत्साह के साथ सामाजिक कार्य शुरू किया। लोगो की श्रीहरि जीवतोड़े के प्रति आस्था और निष्ठा के कारण डाॅ. अशोक जीवतोड़े ऐसा करने में सक्षम थे. उसके बाद अपने पिता की तरह उनकी रुचि भी पृथक विदर्भ राज्य में हो गयी। उनके नेतृत्व में विदर्भ राज्य के पृथक्करण एवं विदर्भ राज्य के समग्र विकास हेतु जनजागरण एवं व्याख्यान आयोजित किये गये तथा इस कार्य में लोगों की भागीदारी बढ़ी। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में ओबीसी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने अथक प्रयास किया। उन्होंने एक समय देवेन्द्र फड़नवीस, हंसराज अहीर, शरदजी यादव, बंडारू दत्तात्रेय, तेजस्वी यादव, इंद्रजीत सिंह, हुकुम देव नारायण सिंह और देश के कई राजनीतिक और सामाजिक नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी समुदाय के कार्यों में भाग लिया।
इसी का नतीजा है 8 दिसंबर 2016 को नागपुर विधानसभा पर लाखों लोगों का मोर्चा इसी का नतीजा था। स्नातक मतदान पंजीयन में नागपुर विभाग के अंतर्गत चंद्रपुर जिले में उस समय 20 हजार से अधिक स्नातकों का पंजीयन किया, जिससे 2008 में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उस समय नितिन गडकरी और 2014 में अनिल जी सोले निर्वाचित हुए।
शिक्षा के क्षेत्र में पूर्व विदर्भ के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अशोक जीवतोड़े के प्रभाव से नागोजी गानर 2010 और 2016 में चुने गए थे।
इसके बाद जिन लोगों को उन्होंने अपना समर्थन देने की घोषणा की वे सभी निर्वाचित हुए।
डॉ अशोक जीवतोड़े ने भारतीय जनता पार्टी के सभी उम्मीदवारों को लोकसभा और विधानसभा के लिए निर्वाचित कराने में मदद करने का हरदम प्रयास किया। 2019 में भाजपा के हंसराज अहीर काफी कम मतो से हारे. 2024 में अशोक जीवतोड़े ने इच्छा जताई थी की अगर पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी देती है तो वह लेने तैयार हैं. हालांकि, ओबीसी आंदोलन और भारतीय जनता में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें राजनीतिक मौका नहीं मिला. फिर भी, उन्होंने काम करना जारी रखा.
सामाजिक सरोकार, शैक्षणिक एवं राजनीतिक विरासत उन्हें घर से ही मिली। अपने भाई स्व. संजय जीवतोड़े को निर्दलीय जिला परिषद चुनाव में निर्वाचित कराया और 2004 में भद्रावती वरोरा विधान सभा में भी संजय जीवतोड़े को अच्छे वोट मिला। स्वर्गीय श्रीहरि जीवतोड़े गुरुजी स्वयं 1967 में राजुरा विधान सभा में एक स्वतंत्र विधायक के रूप में चुने गए थे। धनोजे कुनबी और विदर्भ विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रम और आंदोलन आयोजित कर लोगों को विदर्भ विकास का महत्व समझाया, आंदोलन द्वारा राज्य तथा केंद्र सरकार से 24 मांगे मानव कर शासन निर्णय निकाला यही ओबीसी आंदोलन की सफलता है डॉ. अशोक जीवतोड़े अपने पिता स्वर्गीय श्रीहरि जीवतोड़े गुरुजी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। उच्च शिक्षा, अच्छे जनसंपर्क, चुनावों में अनुभव, कोई दुश्मन नहीं और लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होने वाला और लोगों के काम को आसान बनाने वाला एक प्रसिद्ध मुस्कुराता हुआ व्यक्तित्व के रूप में अशोक जीवतोड़े प्रसिद्ध हैं। चूँकि वह पूर्वी विदर्भ में विभिन्न शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सहकारी क्षेत्र और राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहते हैं इसलिए डॉ. अशोक जीवतोड़े का संपर्क जबरदस्त है.
सोशल मीडिया पर डाॅ. अशोक जीवतोड़े लगातार सक्रिय हैं. उनके काम और उनके कार्यक्रमों की खबरें दिन भर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से आती रहती हैं। राजनीतिक क्षेत्र के संबंध में डाॅ. अशोक जीवतोड़े के विचार स्पष्ट हैं की हर चुनाव जीतने के लिए तन मन धन से बिना रुके कार्य करते रहना चाहिए। सामाजिक जवाबदारी ध्यान में रखकर जनता का काम करना चाहिए। पक्ष और कार्यकर्ताओं ने बड़ा किया तो नेता अपने आप बड़ा होता है ऐसा उनका मानना है। शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत होने की वजह से उनके सभी पक्षों के साथ अच्छा संबंध है और नाम मात्र भी उनके शत्रु नहीं है। जिस वजह से उनमें कोई भी नकारात्मक बात नजर नहीं आती। चंद्रपुर, वणी, आर्नी यह बहुजन बहुसंख्य समाज क्षेत्र होने की वजह से यहां के सभी विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार बहुजन ही होना चाहिए अन्यथा दूसरे समाज के उम्मीदवार को जितना मुश्किल हो सकता है ऐसा उनका मानना है।



