गणेश चतुर्थी 2025 से पहले महाराष्ट्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अहम कदम उठाया है। अब प्लास्टर ऑफ पेरिस POP से बनी गणेश मूर्तियों पर एक स्पष्ट लाल रंग का चिन्ह लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय हाल ही में जारी नई सुधारित गाइडलाइन का हिस्सा है, जिससे मूर्तियों की पहचान आसानी से हो सके और पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े। यह नियम राज्यभर के मूर्ति निर्माताओं, विक्रेताओं और गणेश मंडलों पर लागू होगा। सरकार के अनुसार, पीओपी से बनी मूर्तियाँ जल स्रोतों में पूरी तरह नहीं घुलतीं, जिससे नदियों, झीलों और समुद्रों में गंभीर प्रदूषण होता है। इन मूर्तियों में प्रयुक्त रसायन पानी को विषैला बनाते हैं और जल जीवन को खतरे में डालते हैं। इसलिए, सरकार ने न केवल पीओपी मूर्तियों पर लाल निशान अनिवार्य किया है, बल्कि इको-फ्रेंडली मूर्तियों को बढ़ावा देने के लिए भी कई उपाय किए हैं। इनमें कृत्रिम विसर्जन कुंडों की व्यवस्था, सार्वजनिक स्थानों पर केवल मिट्टी की मूर्तियों के विसर्जन की अनुमति और स्कूलों-सामाजिक संस्थाओं को पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
राज्य सरकार ने सभी नागरिकों, गणेश मंडलों और मूर्तिकारों से अपील की है कि वे इस वर्ष ‘हरित गणेशोत्सव’ को अपनाएं और जल प्रदूषण को रोकने में सहयोग करें। प्रशासन को बाजारों में बिक रही मूर्तियों की जांच का अधिकार होगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित त्योहार की ओर संकेत भी है।




