Sunday, April 19, 2026
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MSRTC चंद्रपुर में अप्रेंटिस परीक्षा घोटाला: छात्रों से वसूली का मामला, हेड मैकेनिक का निलंबन फिर FIR क्यों नहीं?

चंद्रपुर, 16 अप्रैल 2026

महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (MSRTC) के चंद्रपुर विभाग में अप्रेंटिस (शिकाऊ उमेदवार) की प्रायोगिक परीक्षा में भ्रष्टाचार और पैसों की वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि आरोप है कि वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय एक हेड मैकेनिक को निलंबित कर दिया गया है, जिसका परीक्षा संचालन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में फरवरी और अगस्त माह में आयोजित प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान कुछ छात्रों से अधिक अंक दिलाने के नाम पर पैसों की मांग की गई। आरोप है कि जिन छात्रों ने पैसे दिए, उन्हें अधिक अंक दिए गए, जबकि जिन्होंने पैसे नहीं दिए, उन्हें कम अंक देकर नुकसान पहुंचाया गया।

बताया जा रहा है कि कुछ छात्रों से नकद राशि ली गई, वहीं कुछ मामलों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से पैसे जमा कराए गए। इसके लिए विभागीय कार्यशाला से जुड़े एक व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। शिकायत में कई ट्रांजेक्शन की तारीख और राशि का उल्लेख किया गया है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम विभागीय कार्यशाला स्तर पर हुआ और इसमें उच्च स्तर के अधिकारियों की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप यह भी है कि यह सब कुछ एक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर किया गया।

हालांकि, मामले के सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए हेड मैकेनिक टेम्बुर्डे को निलंबित कर दिया, लेकिन इस कदम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जिस व्यक्ति को निलंबित किया गया है, उसका परीक्षा आयोजित करने या मूल्यांकन प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं था, ऐसे में उसे “बलि का बकरा” बनाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

यह भी चर्चा है कि हेड मैकेनिक टेम्बुर्डे को केवल दिखावे के लिए और मुख्य आरोपी को बचाने के उद्देश्य से निलंबित किया गया प्रतीत होता है। यदि वास्तव में सख्त कार्रवाई की जाती, तो पैसे लेने के आरोप सामने आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाती। लेकिन FIR दर्ज न होने से यह सवाल उठ रहे हैं कि कहीं पुलिस जांच में मुख्य सूत्रधार का नाम सामने आने की आशंका से यह कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित तो नहीं रखी गई।

मांग की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, छात्रों से अवैध रूप से लिए गए पैसों की निष्पक्ष जांच कर पूरी सच्चाई सामने लाई जाए।

यह मामला सामने आने के बाद विभागीय पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर असली जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचाता है या नहीं।

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