मुंबई में कबूतरखानों के आसपास पक्षियों को दाना डालने पर हाईकोर्ट की रोक के बाद अब जैन समाज आक्रामक हो गया है। दादर कबूतरखाना इलाके में अदालत के आदेश के बावजूद कुछ लोगों ने पक्षियों को दाना डाला, जिस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। इसके बाद जैन समाज ने ऐलान किया है कि वे इस फैसले के विरोध में 13 तारीख से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू करेंगे। जैन मुनि निलेशचंद्र विजय ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो शांतिप्रिय समाज भी अपने धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठा लेगा और कोर्ट के आदेश को नहीं मानेगा। मुनि निलेशचंद्र विजय ने कहा कि जैन समाज हमेशा से सत्याग्रह और उपवास का मार्ग अपनाता आया है, लेकिन धर्म के खिलाफ जाने वाले किसी भी आदेश को वे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम संविधान, कोर्ट और सरकार को मानते हैं, लेकिन जब धर्म पर आंच आती है, तो अदालत का आदेश भी मान्य नहीं होगा। उनका कहना है कि कबूतरों का मरना जैन धर्म में अस्वीकार्य है और यह आंदोलन पूरे देश के जैन समुदाय को जोड़कर किया जाएगा। उनके अनुसार, देशभर से करीब 10 लाख जैन दादर में उपवास पर बैठेंगे।
जैन मुनि ने यह भी सवाल उठाया कि शराब और मांस खाने से मरने वालों पर किसी का ध्यान क्यों नहीं जाता, जबकि निर्दोष पक्षियों को दाना डालने पर रोक लगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पालिका से कबूतरों को दाना डालने की अनुमति मांगी गई है, क्योंकि जैन धर्म में मुंगी से लेकर हाथी तक किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना पाप माना गया है। उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मनसे और ठाकरे गुट इस पर क्या रुख अपनाते हैं।




