धानोरकर की मां ने की जांच की मांग – मचा हड़कंप
कौन है शक के घेरे में?
अभी क्यों उठ रही है यह मांग?
चंद्रपुर, महाराष्ट्र – 10/11/24
आखिरकार चंद्रपुर के पूर्व सांसद दिवंगत बालू धानोरकर के मृत्यु से संबंधित जो बात दबी आवाज में उनके मृत्यु के समय से चल रही थी उस चिंगारी ने आग पकड़ ली और उनकी मां ने अपने बेटे की मृत्यु में षड्यंत्र की बात कह कर जांच की मांग की है जिससे राजनीतिक गलियारों में गली से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है।
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बालू धानोरकर अपनी आक्रामक शैली की वजह से जाने पहचाने जाते थे और जिस तरह उन्होंने एक सामान्य शिवसैनिक से विधायक और फिर कांग्रेस सांसद तक का सफर तय किया, ऊससे उनकी प्रसिद्धि कुछ ही समय में आसमान छू रही थी। हजारों विरोधक होने के बावजूद लाखों उनके चाहने वाली भी थे। जिंदादिली से जीने वाले बालू धानोरकर की अचानक मृत्यु से उनके चाहने वाले अचंभित हो गए थे। कोई मानने तैयार ही नहीं था कि इस तरह उनका नेता अचानक मृत्यु के मुंह में जा सकता था। इसीलिए उनके मृत्यु के समय से ही लोग दबी आवाज में अलग-अलग बात कर रहे थे और इसके पीछे किसी का षड्यंत्र तो नहीं यह शंका जता रहे थे।
मगर अब विधानसभा चुनाव के रणसंग्रमाम के बीच खुलकर आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में कई वर्षों से चुनाव में एकजुट रहनेवाले धानोरकर परिवार में भी इस चुनाव में दरार आ गयी है। तत्कालीन सांसद बालू धानोरकर की मां वत्सला धानोरकर ने यह कहकर हड़कंप मचा दिया कि, मेरे बेटे बालू की मृत्यु सामान्य नहीं है बल्कि घातपात है। क्योंकि उसकी उम्र जाने की नहीं थी। चुनाव के बाद मृत्यु की जांच करने की मांग हम करेंगे, ऐसा भी उन्होंने कहा।
बता दें कि, तत्कालीन सांसद बालू धानोरकर के निधन के बाद कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में उनकी पत्नी वरोरा की तत्कालीन विधायक प्रतिभा धानोरकर को टिकट दी और वे चुनाव में भारी वोटों से जीती। उसके बाद वरोरा की सीट खाली हुई। इस सीट पर बालू धानोरकर के बड़े भाई अनिल धानोरकर चुनाव लड़ना चाहते थे परंतु सांसद प्रतिभा धानोरकर ने जेठ का पत्ता कट करते हुए अपने भाई प्रवीण काकडे को टिकट दिलाई।
इससे नाराज होकर अनिल धानोरकर बहुजन आघाड़ी से मैदान में उतरे और उनकी मां वत्सला धानोरकर व परिवार उनके प्रचार जुटा है। जबकि सांसद अपने भाई काकडे का प्रचार कर रही है। टिकट के कारण ही धानोरकर परिवार में दरार आ गई है। ऐसे में वत्सला धानोरकर ने मीडिया से बातचीत में उक्त आरोप लगाने से तरह-तरह के चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में अनिल धानोरकर ने प्रतिभा धानोरकर का पूरा प्रचार किया था। वह भद्रावती के नगर अध्यक्ष और शिवसेना के जिला प्रमुख भी रह चुके हैं और बालू धानोरकर के हर प्रचार-प्रसार में पूर्णतया सम्मिलित रहते थे। इसलिए उनको वरोरा भद्रावती का स्वाभाविक उम्मीदवार माना जा रहा था। मगर विधायक से सांसद बनी प्रतिभा धानोरकर ने इसकी अनदेखी करके अपनी जीद से अपने सगे भाई प्रवीण काकडे जो कि किसी पद पर नहीं थे न ही राजनीति में सक्रिय थे उनके लिए अपना विटो पावर लगाकर कांग्रेस की टिकट लेकर आई, उसके बाद से धानोरकर परिवार में खुली फूट पड़ गई। अब देखना होगा की इलेक्शन होने तक क्या किसी का नाम इस षड्यंत्र से जुड़ता है या सही में दिवंगत सांसद की मृत्यु की जांच के आदेश होते हैं?



