*कई जगह भगदड़ होने से बच गई, जा सकती थी सैकड़ो जाने*
दिनांक 17 सितंबर 2024 को संपन्न हुए चंद्रपुर के सार्वजनिक गणेश विसर्जन की रैली के बाद सही में चंद्रपुर की जनता गणपति बाप्पा का शुक्रिया अदा करना चाह रही है। क्योंकि सैकड़ों लोगों की इस दौरान जान जा सकती थी। मगर बाप्पा के आशीर्वाद से ऐसा कुछ नहीं हुआ। हुआ यूं कि पोलिस प्रशासन की ओर से केवल शहर के हर रास्ते और चौराहे पर बैरीकेट लगाकर यातायात रोक दी गई थी। मगर उसके बाद चंद्रपुर के दो मुख्य रास्ते कस्तूरबा रोड और महात्मा गांधी मेन रोड पर किसी भी तरह का नियोजन या व्यवस्था प्रबंध पोलिस या प्रशासन द्वारा नही किए गए थे। जब की चंद्रपुर का विसर्जन पूरे देश में एक विशेष विसर्जन के रूप में होता है। और इन दो रास्तों पर लांखो की तादाद में पूरे जिले से महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े, गणपति बाप्पा के अंतिम दर्शन करने के लिए आते है। इस वर्ष भी 17 तारीख को दोपहर 3 बजे के बाद से भिड़ बढ़ना शुरू हुई, और हैं होते होते चंद्रपुर की इन दो सड़कों पर अंदाजे 3 लाख से अधिक पब्लिक घूम रही थी जिसमें से कुछ पॉइंट्स पर, जैसे की आजाद बगीचा चौक, गिरनार चौक, गांधी चौक, जैन टॉकीज चौक में लाखो की संख्या में गर्दी जमा थी।

इस बार कुछ महिलाएं और लड़कियां भी अकेले ही दर्शन के लिए आई थी और उन्हे इस गर्दी में धक्का मुक्की सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ शरारती तत्व जान बूझ कर धक्का मुक्की कर रहे थे, और काफी महिलाओं के साथ छेड़खानी के मामले भी सामने आए है। मगर आश्चर्यजनक रूप से इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए या शरारती तत्वों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सड़कों पर कही भी पोलिस या तो नजर नहीं आ रही थी, या फिर इक्का दुक्का जगह हाथ बांधे खड़ी पोलिस दिखाई दे रही थी। ऐसे में अगर एक भी व्यक्ति धक्का खाकर गिर जाता तो उसके बाद बहुत बड़ा हादसा घट सकता था। जो की गणपति के आशीर्वाद से नहीं हुआ। मगर शानदार विसर्जन का नियोजन करने वाली महानगरपालिका जिन्होंने विशेष कुंड बनाया था, ऐसी महानगरपालीका, पोलिस प्रशासन और जिला प्रशासन इस भीड़ का अंदाज होने के बावजूद रस्तो पर सुरक्षा प्रबंधन करने में चूक गई। इस वजह से कोई बड़ा हादसा हो सकता था, ऐसी लोगों में तीव्र भावना है।



