उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में पटियाला पुलिस स्टेशन अंतर्गत 14 वर्षीय किशोरी के विनयभंग प्रकरण में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कनिष्ठ अदालत का निर्णय बदलकर आरोपियों को निर्दोष मुक्त किया है। महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष कुंदा राऊत ने अदालत के इस निर्णय से असहमति व्यक्त कर सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का निर्णय रद्द करने की गुहार पत्र परिषद में लगाई। उन्होंने कहा कि उस निर्णय को कायम रखने पर न्यायव्यवस्था में गलत परिपाटी पड़ जाएगी। पीड़ित अपनी माता के साथ रास्तों से जाते समय पवन, आकाश और अशोक ने उसी दोपहिया से छोड़ देने का झांसा देकर मोटरसाइकिल पर बैठाया। आगे जाकर एक पुल के पास गाड़ी रोकी और किशोरी के साथ अनैतिक बर्ताव कर कपड़े उतारने का प्रयास किया गया। पीड़िता ने चीख-पुकार करने पर आसपास के लोग जमा हुए। उनके आने से पहले ही आरोपी वहां से फरार हो गए। इस घटना की पीड़ित की माता ने पुलिस स्टेशन में शिकायत लिखवाई। आरोपी के खिलाफ धारा 376, धारा 354-बी व पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 के तहत गुनाह दर्ज किया गया। कनिष्ठ अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति राममनोहर मिश्रा ने कनिष्ठ न्यायालय का निर्णय रद्द कर आरोपियों को दोष मुक्त किया।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया है कि गुप्तांग पकड़ना, कपड़े उतारने का प्रयास बलात्कार नहीं हो सकता। राऊत ने अदालत के इस निर्णय से असहमति व्यक्त कर सवाल उपस्थित किया। अदालत के इस निर्णय से अपराधी प्रवृत्ति को बल मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट से यह निर्णय बलदकर महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने की मांग की है। केंद्र सरकार से अपने वकील हाई कोर्ट में नियुक्त कर महिलाओं के पक्ष में अदालत में पैरवी करने की मांग की है। पत्र परिषद में पूर्व जिप अध्यक्ष रश्मि बर्वे, पूर्व सभापति अवंतिका लेकुरवाले, पूर्व नगसेवक दर्शनी धवड़, पूर्व सभापति रुपाली मनोहर, करुणा भोवते उपस्थित थीं।



