चंद्रपुर महानगरपालिका की सर्वसाधारण सभा में गुरुवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब महानगर आघाड़ी के गटनेते और नगरसेवक पप्पू देशमुख ने महापौर सौ. संगीता राजेंद्र खांडेकर को पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई। देशमुख ने सभागृह में विस्तृत लिखित निवेदन पेश करते हुए आरोप लगाया कि महापौर ने अपने वैधानिक कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही बरती है और नियमों का खुला उल्लंघन किया है। उन्होंने यह निवेदन आयुक्तों के माध्यम से राज्य शासन को भेजने की मांग भी की। देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र महानगरपालिका नियम, 2012 के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के एक महीने बाद होने वाली पहली सर्वसाधारण सभा में नामनिर्देशित सदस्यों की नियुक्ति का विषय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन महापौर ने चुनाव के बाद तीन महीने तक सभा ही नहीं बुलाई और जब सभा आयोजित की गई तब भी इस महत्वपूर्ण विषय को जानबूझकर एजेंडे से बाहर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नामनिर्देशित सदस्यों की नियुक्ति को टालने के उद्देश्य से ही तीन महीनों तक सभा नहीं बुलाई गई।

नगरसेवक देशमुख ने आगे कहा कि महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 19(6) के अनुसार प्रत्येक महीने की 20 तारीख तक सर्वसाधारण सभा आयोजित करना आवश्यक है, लेकिन इस नियम की भी अनदेखी की गई। उन्होंने महापौर पर वैधानिक जिम्मेदारियों में कसूर करने का आरोप लगाते हुए अधिनियम की धारा 10(1) और 10(1-1अ) के तहत उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई करने की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद चंद्रपुर की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और अब शासन की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हैं।



