चंद्रपुर |
चंद्रपुर भाजपा की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा चंद्रपुर ग्रामीण जिला कार्यकारिणी को निरस्त किए जाने के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह कार्यकारिणी ग्रामीण जिलाध्यक्ष हरीश शर्मा के नेतृत्व में तथा वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार के मार्गदर्शन में गठित की गई थी।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को केवल एक संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि चंद्रपुर भाजपा में लंबे समय से चल रहे शक्ति-संतुलन के संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुधीर मुनगंटीवार भाजपा ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ-साथ राज्य सरकार में वित्त, योजना एवं वन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व कर चुके हैं। एक समय उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार भी माना जा रहा था।
वर्ष 2010 से 2013 तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल काफी प्रभावशाली माना जाता है। हालांकि, 2013 में विधानसभा चुनाव से पहले उनका कार्यकाल समाप्त हुआ और देवेंद्र फडणवीस को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद 2014 में भाजपा ने महाराष्ट्र में सरकार बनाई और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस समय मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सुधीर मुनगंटीवार का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा था। मुख्यमंत्री नहीं बनने के बावजूद उन्होंने वित्त, योजना और वन मंत्री के रूप में अपनी अलग कार्यशैली और मजबूत प्रशासनिक पकड़ बनाए रखी।
वर्ष 2024 में देवेंद्र फडणवीस के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद सुधीर मुनगंटीवार को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला। उस समय पार्टी नेतृत्व की ओर से कहा गया था कि उन्हें उचित समय पर उचित जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य भाजपा के बदलते शक्ति-संतुलन के रूप में भी देखते हैं।
चंद्रपुर भाजपा में इससे पहले सुधीर मुनगंटीवार और हंसराज अहीर के बीच राजनीतिक मतभेद भी सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय रहे हैं। बाद के वर्षों में चिमूर के विधायक बंटी भांगड़िया तथा चंद्रपुर के विधायक किशोर जोरगेवार की संगठन और सरकार में बढ़ती सक्रियता को भी राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जाने लगा।
बताया जाता है कि संगठन और स्थानीय नेतृत्व को लेकर मतभेद लगातार गहराते गए। विधानसभा के दौरान भी सुधीर मुनगंटीवार ने कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार से सवाल पूछे, जिसे राजनीतिक हलकों में उनके स्वतंत्र रुख के रूप में देखा गया।

इसी बीच चंद्रपुर भाजपा की जिला कार्यकारिणी घोषित हुई, जिसमें शहर संगठन की जिम्मेदारी किशोर जोरगेवार समर्थक खेमे को तथा ग्रामीण संगठन की जिम्मेदारी मुनगंटीवार समर्थक खेमे को मिलने की चर्चा रही। इसके कुछ समय बाद सुधीर मुनगंटीवार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में आरक्षण समाप्त होने की स्थिति में वे चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति और अधिक गर्मा गई।
इसके बाद चंद्रपुर ग्रामीण भाजपा की नई कार्यकारिणी घोषित की गई, जिस पर आरोप लगे कि इसमें शहर क्षेत्र के कई पदाधिकारियों को शामिल किया गया तथा वरिष्ठ नेता हंसराज अहीर सहित अन्य नेताओं से पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया गया। बाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने इस कार्यकारिणी को निरस्त कर दिया।
कार्यकारिणी निरस्त किए जाने के बाद सुधीर मुनगंटीवार की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे अब चंद्रपुर की संगठनात्मक राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रपुर भाजपा का संगठन अब प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण देख रहे हैं, इसलिए जिले से जुड़े संगठनात्मक प्रश्न उन्हीं अथवा मुख्यमंत्री से पूछे जाएं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंद्रपुर भाजपा में लंबे समय से चल रहा शक्ति-संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यदि संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा निर्णय होता है, तो यह विवाद और गहरा सकता है। ऐसी स्थिति में मामला राज्य नेतृत्व से आगे बढ़कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप तक पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।



